Wednesday, February 11, 2026

Story: सादगी ही सुकून 3

अध्याय 3: "अजनबी लड़की" की एंट्री

तभी टपरी पर एक और परेशान लड़की अपना लैपटॉप खोलकर बैठती है, और आर्यन मुस्कुराकर काका की तरह उसे कुल्हड़ आगे बढ़ा देता है।

आर्यन और काका अभी अपनी चाय का आनंद ले ही रहे थे कि एक टैक्सी टपरी के सामने रुकी। उसमें से एक लड़की उतरी, जिसके एक हाथ में फोन था और दूसरे में लैपटॉप बैग। वह फोन पर किसी से उलझी हुई थी, "नहीं, मैं अभी क्लाइंट को भेज रही हूँ... हाँ, बस 5 मिनट!"

वह बदहवास सी आकर बेंच के कोने पर बैठ गई और काका की ओर देखे बिना बोली, "काका, स्ट्रॉन्ग कॉफी मिलेगी? और वाई-फाई का पासवर्ड क्या है?"


काका मुस्कुराए और आर्यन की ओर देखा। आर्यन ने देखा कि उस लड़की की आँखों के नीचे वही काले घेरे और वही थकावट थी, जिसे वह कल तक खुद महसूस कर रहा था।

आर्यन धीरे से उठा, पास रखे मटके से ठंडा पानी एक गिलास में भरा और उसकी टेबल पर रख दिया। लड़की ने चौंककर ऊपर देखा। आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा, "यहाँ वाई-फाई तो नहीं है, पर सुकून बहुत है। कॉफी की जगह काका की अदरक वाली चाय ट्राई कीजिये, आपके क्लाइंट के मैसेज से ज़्यादा असरदार है।"

लड़की ने पहले तो झिझक दिखाई, फिर आर्यन के शांत चेहरे और काका की निश्चिंत मुस्कान को देखकर अपना लैपटॉप धीरे से बंद कर दिया। उसने एक लंबी सांस ली और कहा, "शायद... मुझे इसकी ज़रूरत है।"

काका ने चाय बढ़ाते हुए धीरे से आर्यन के कान में कहा, "देखा बेटा, सादगी संक्रामक (contagious) होती है। एक दीये से दूसरा जलता है।"

आर्यन ने महसूस किया कि आज वह सिर्फ एक ब्लॉग का आर्टिकल नहीं लिख रहा था, बल्कि वह खुद उस सादगी का हिस्सा बन चुका था।

जैसे ही आर्यन ने उस अजनबी लड़की की ओर चाय का कुल्हड़ बढ़ाया, वह सकपका गई। उसने अपना फोन कान से हटाया और आर्यन को ऐसे देखा जैसे वह किसी दूसरी दुनिया से आया हो।

"शुक्रिया, पर मुझे अपना काम खत्म करना है," उसने घड़ी देखते हुए कहा।

आयन मुस्कुराया और वहीं बेंच के दूसरे कोने पर बैठ गया। "काम तो कभी खत्म नहीं होगा, लेकिन यह चाय ठंडी ज़रूर हो जाएगी। काका की चाय में एक जादुई 'फीचर' है—इसे पीते ही दिमाग के सारे फालतू टैब्स अपने आप बंद हो जाते हैं।"

लड़की के चेहरे पर पहली बार एक हल्की सी मुस्कान आई। उसने झिझकते हुए कुल्हड़ थाम लिया। जैसे ही उसने पहली चुस्की ली, अदरक और इलायची की खुशबू ने उसके तनाव को जैसे हवा में उड़ा दिया।

काका पीछे से बोले, "बेटा, ये आर्यन भी कल तक तुम्हारी तरह ही 'अपडेट' होने की रेस में भाग रहा था। आज देखो, बिना चार्जर के भी चमक रहा है!"

लड़की ने अपना नाम बताया—इशानी। वह एक ग्राफिक डिजाइनर थी जो हफ्तों से एक प्रोजेक्ट में फंसी थी। अगले एक घंटे तक, उस टपरी पर कोई लैपटॉप नहीं खुला। आर्यन, काका और इशानी ने असल जिंदगी के बारे में बातें कीं।

इशानी ने महसूस किया कि जिसे वह 'इमरजेंसी' समझ रही थी, वह सिर्फ उसके दिमाग का शोर था। उसने फोन को साइलेंट किया और बैग में डाल दिया।

काका ने धीरे से आर्यन के कान में कहा, "देखा बेटा, सादगी संक्रामक होती है। एक दीये से दूसरा जलता है।"

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